अरुणाचल की कहानियाँ-05 : अरुणाचल के इस गाँव का नाम तिवारी गाँव क्यों पड़ा ?

मैंने निष्कर्ष निकाला कि बिहार-यूपी से आए लोगों की जनसंख्या यहाँ बहुत ज़्यादा होगी और इसी कारणवश यह नाम पड़ा होगा. लेकिन यहां मामला कुछ और निकला.

अमरकंटक: मध्य प्रदेश के दिल में बसी ऐसी जगह जिससे कभी मन नहीं भरता.

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मैकल पहाड़ो में बसा अमरकंटक. जहाँ आकर मन, मस्तिष्क और आत्मा प्रफुल्लित हो जाते हैं. इस जगह के सान्निध्य मात्र से मानसिक तनाव और शारीरिक थकान दूर हो जाती है.
महाकवि कालिदास ने “मेघदूत” में इस जगह में रुकने के लिए कहा है. इसलिए आपको इस रमणीय स्थल पर कुछ दिन जरूर गुजारने चाहिए.

अरुणाचल की कहानियाँ-04 : मोबाइल नेटवर्क और पेसा से मुलाकात

कहानी सुनाने के दौरान बार-बार उस पहाड़ की ओर उंगली दिखाते जो खाली पड़ा था, जिस पर न भारत के सैनिक थे और न ही चीन के. लगता था मानों अपनी ज़िंदगी की ओर इशारा कर रहे हों.

अरुणाचल की कहानियाँ- 03  : भारत का आख़िरी नहीं, बल्कि पहला गाँव

दुनिया की कुछ सबसे ख़ूबसूरत जगहों और पुलों से गुज़रकर, वालोंग से क़रीब 30 किलोमीटर दूर जब काहो पहुँचा तो लगा कि ज़िंदगी में जितनी आर्मी आज तक नहीं देखी, उससे ज़्यादा अभी ही देख ली.

अरुणाचल की कहानियाँ- 02  : बैटल ऑफ़ वालोंग और बिहार रेजिमेंट

सेना के बैरियर पर मुझे रोक लिया गया और रजिस्टर में एंट्री करवाई गई। ऐसी किसी संवेदनशील जगह पर पहली बार बिहार रेजिमेंट से सामना हुआ.

अरुणाचल की कहानियाँ- 1: वो घर जो रेलगाड़ी के डिब्बे जैसा था

नागालैंड के बाद मैंने अरुणाचल की यात्रा भी इसी नोट पर शुरू की थी कि ग्रामीण और अलग-अलग क़बीले के जीवन को पास से देखना है.

लैंसडाउन के रास्ते पर इतनी ख़ास क्यों है ये आम सी जगह?

दिल्ली और आस-पास से वीकेंड के लिए निकलने की यह एक बढ़िया और आरामदेह जगह है.

अलवर, भानगढ़ और सरिस्का की सैर… आओ कभी हवेली पर

भानगढ़ किला, हां वही राजस्थान का भानगढ़ जिसके भूतिया होने की कहानी प्रचलित है और जहां सूर्यास्त के बाद अंदर जाना मना है.  

गोवा का ये रंग देखा है आप ने?

ये रंग शायद गोवा का रंग है. जो तीखी धूप में और चटकीला हो जाता है. ये रंग आंखों को एक खास तरह का सूकून देता है.

छत्तीसगढ़ डायरी: डोंगरगढ़ – सिटी ऑफ़ ब्लिस

कुछ जगहों के बारे में हम लिख नहीं सकते सिर्फ महसूस ही कर सकते हैं. ये जगह वैसी ही थी. महसूस करने और खुद को यहां की पॉजिटिव वाइब्स में डुबा देने की.

छत्तीसगढ़ में… छह दिन…

छत्तीसगढ़ में हों तो बिना छत्तीसगढ़ी व्यजंन चखे यात्रा अधूरी रहेगी. और इसका जायका हमेशा के लिए बस जाएगा जुबां पर.

गोवा: कसीनो, बीयर और समंदर के किनारों से कुछ अलग

फ्लैशबैक से वापस आज ठीक 23 साल बाद, मैं सावन की घटाओं में घिरे गोवा में, फिर लौट आयी. लेकिन आज समुद्र नहीं…